झारखंड की संस्कृति (Jharkhand ki Sanskriti) झारखंड की संस्कृति भारत की सबसे समृद्ध जनजातीय संस्कृतियों में से एक है। यहाँ अनेक जनजातियाँ जैसे संथाल, मुंडा, उराँव, हो, बिरहोर और असुर अपनी पारंपरिक जीवनशैली, कला, संगीत और रीति-रिवाजों को आज भी जीवित रखे हुए हैं। मुख्य विशेषताएँ: भाषाएँ: हिंदी के साथ-साथ संथाली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, नागपुरी, खोरठा और पंचपरगनिया जैसी भाषाएँ बोली जाती हैं। लोक नृत्य: छऊ, करमा, झूमर, पैका और संथाली नृत्य यहाँ के प्रमुख लोकनृत्य हैं। लोक संगीत: मांदर, ढोल, नगाड़ा, बाँसुरी और शहनाई जैसे वाद्ययंत्रों के साथ लोकगीत गाए जाते हैं। त्योहार: सरहुल, करमा, सोहराय, टुसू, फगुआ और माघ पर्व बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। कला एवं शिल्प: सोहराय और कोहबर चित्रकला, पैतकर पेंटिंग, बाँस और लकड़ी की हस्तकला, मुखौटा निर्माण तथा पत्थर की नक्काशी प्रसिद्ध हैं। भोजन: धुसका, पिठा, चिलका रोटी, हांड़िया, रुगड़ा और बाँस की कोपलों से बने पारंपरिक व्यंजन लोकप्रिय हैं। निष्कर्ष: झारखंड की संस्कृति प्रकृति, जनजातीय परंपराओं, लोककला, संगीत और सामुदायिक जीवन पर आध...